‘बीजेपी के लिए शिक्षा व्यापार और परीक्षा प्रणाली दशानन’, युवाओं को लेकर अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा

प्रयागराज: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव सोमवार को प्रयागराज में आयोजित ‘विज़न इंडिया (PDA)’ कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने “शिक्षा, परीक्षा और क्यों हुई ध्वस्त व्यवस्था” विषय पर बोलते हुए केंद्र और राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखे हमले किए। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि देश का जो ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ (युवा आबादी की ताकत) हमारी सबसे बड़ी ताकत होना चाहिए था, वह सरकार की गलत नीतियों के कारण आज आपदा में बदलता जा रहा है।

अखिलेश यादव ने कहा कि पेपर लीक होने, परीक्षाएं रद्द होने और पद खाली रहने से युवाओं में मानसिक तनाव और अविश्वास बढ़ रहा है। इसी हताशा के कारण कई कम उम्र के युवा आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं।

बीजेपी सरकार के एजेंडे में नौकरी ही नहीं

सपा प्रमुख ने सीधे शब्दों में कहा कि पिछले 10 सालों के कार्यकाल से यह साफ हो चुका है कि भाजपा के एजेंडे में युवाओं को नौकरी देना शामिल ही नहीं है। उन्होंने नौकरी न देने के पीछे सरकार के तीन मुख्य कारण गिनाए:

  1. सरकारी हेराफेरी का मंसूबा: युवाओं का गुस्सा केवल चुनाव में निकलता है, जिसे भाजपाई सरकारी हेराफेरी से जीत लेने का मंसूबा पाले रहते हैं।

  2. कमिशनखोरी और संविदा को बढ़ावा: सरकारी नौकरी में निश्चित वेतन राजकोष से सीधे खाते में जाता है, जिसमें कमीशनखोरी नहीं हो पाती। इसलिए सरकार संविदा (Outsourcing) को बढ़ावा दे रही है ताकि ठेकेदारों के जरिए मोटा कमीशन वसूला जा सके।

  3. आरक्षण की लूट: संविदा पर नौकरियां देने का सबसे बड़ा नुकसान ‘पीडीए’ (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) समाज को हो रहा है। इसके जरिए नियमों के अनुसार मिलने वाले आरक्षण को पूरी तरह से मार दिया जाता है।

‘नॉट फाउंड सूटेबल’ का बोर्ड टांगकर नौकरियां छीनीं

अखिलेश यादव ने उच्च शिक्षा और विश्वविद्यालयों की नियुक्तियों पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि योग्य उम्मीदवार होने के बावजूद अधिकतम पदों पर जानबूझकर ‘नॉट फाउंड सूटेबल’ (Not Found Suitable) का बोर्ड टांग दिया जाता है। शिक्षा के सभी विभागों में इस तरीके को अपनाकर युवाओं के रोजगार को छीना जा रहा है और नियुक्तियों में आरक्षण की धांधली और पक्षपात किया जा रहा है।

भाजपा की परीक्षा प्रणाली को बताया ‘दशानन’

सपा प्रमुख ने भाजपा की परीक्षा नीति की तुलना दशानन (दस सिर वाले रावण) से की। उन्होंने इसके 10 रूप गिनाए:

हेरफेर करने वाले, गलत प्रश्नोत्तर छापने वाले, पेपर लीक कराने वाले, सॉल्वर का जुगाड़ करने वाले, परीक्षा की तारीख टलवाने वाले, परीक्षा रद्द करने वाले, मूल्यांकन में कॉपी बदलने वाले, आरक्षण मारने वाले, रिजल्ट लटकाने वाले और जानबूझकर कोर्ट में केस हार जाने वाले।

अखिलेश ने कहा कि इस पूरी साजिश का मकसद 95% पीडीए समाज को 5% प्रभुत्वशाली लोगों के लिए सस्ते श्रम के रूप में उपलब्ध कराना है।

मर्जर के नाम पर 20 हजार प्राइमरी स्कूल बंद

बुनियादी शिक्षा पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि बजट का एक बड़ा हिस्सा विज्ञापनों और इवेंट्स की सजावट में खर्च किया जा रहा है, जबकि प्राथमिक स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। उन्होंने दावा किया कि मर्जर के नाम पर पूरे उत्तर प्रदेश में 20,000 से ज्यादा और खुद मुख्यमंत्री के गृह जनपद में 500 प्राइमरी स्कूलों को बंद कर दिया गया है।

अखिलेश ने कहा कि स्कूल दूर होने और टॉयलेट की सुविधा न होने के कारण सबसे ज्यादा खामियाजा बेटियों को भुगतना पड़ता है, जिनकी पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है। शिक्षकों का मनोबल गिराने के लिए उन्हें बीएएलओ (BLO), जनगणना, पशु गणना और यहाँ तक कि चारा इकट्ठा करने जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगा दिया जाता है।

अखिलेश यादव ने अपने संबोधन का अंत करते हुए नारा दिया, “शिक्षा अच्छी होगी, परीक्षा सच्ची होगी तो तरक्की पक्की होगी।” उन्होंने वादा किया कि जब समाजवादी सरकार सत्ता में आएगी, तो प्रयागराज की इस धरती से उठने वाले इन ठोस सुझावों को लागू कर शिक्षा और परीक्षा की व्यवस्था को पूरी तरह सुधारा जाएगा।

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