अखिलेश यादव का बड़ा विजन: ‘हेल्दी इंडिया’ सिर्फ एक स्लोगन नहीं, बल्कि मिशन होना चाहिए

भुवनेश्वर: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने भुवनेश्वर में आयोजित ‘विजन इंडिया पी.डी.ए.’ (Vision India P.D.A.) समिट में देश के स्वास्थ्य ढांचे को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। ‘होलिस्टिक हेल्थ’ (Holistic Health) यानी समग्र स्वास्थ्य के विषय पर बोलते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि “हेल्दी इंडिया (Healthy India) सिर्फ एक स्लोगन नहीं, बल्कि एक मिशन होना चाहिए।”

‘तन, मन और वातावरण’ का संतुलन है होलिस्टिक हेल्थ

अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने होलिस्टिक हेल्थ को सरल शब्दों में परिभाषित करते हुए इसे ‘तन, मन और वातावरण’ का संतुलन बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में लोग बीमारी और इलाज में उलझे हैं, जबकि फोकस ‘वेलनेस’ (Wellness) और बीमारी से बचाव (Preventive Care) पर होना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर हमारा वातावरण चाहे वह घर हो, ऑफिस हो या समाज सकारात्मक है, तो हमारा स्वास्थ्य अपने आप बेहतर होगा।”

स्वास्थ्य बजट: खर्च नहीं, निवेश की जरूरत

सपा अध्यक्ष (Akhilesh Yadav) ने नीतिगत बदलाव की वकालत करते हुए कहा कि सरकारों को स्वास्थ्य पर किए जाने वाले खर्च को ‘खर्च’ (Expenditure) मानने की बजाय इसे मानव संसाधन पर ‘निवेश’ (Investment) मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ नागरिक ही देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बना सकता है। अगर कोई व्यक्ति बीमार पड़ता है, तो न केवल उसका, बल्कि उसके पूरे परिवार और अंततः देश की उत्पादकता का नुकसान होता है।

सपा सरकार के ‘हेल्थ मॉडल’ की चर्चा

कार्यक्रम में मौजूद पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के साथ चर्चा करते हुए अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी सरकार ने उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव किए थे:

  • 108 और 102 एम्बुलेंस सेवा: यह सेवा सिर्फ एक गाड़ी नहीं थी, बल्कि इसने गांव-गांव तक ‘इमरजेंसी केयर’ पहुंचाई।

  • मुफ्त इलाज और जांच: डायलिसिस, एक्सरे और एमआरआई जैसी महंगी जांचें मुफ्त की गईं।

  • हौसला पोषण मिशन: कुपोषण से निपटने के लिए अलग बजट बनाकर गर्म पका हुआ भोजन (Hot Cooked Meal) देने की व्यवस्था की गई।

  • विधायक निधि का उपयोग: देश में पहली बार विधायकों को अपनी निधि से गरीब मरीजों के इलाज के लिए आर्थिक मदद देने की अनुमति दी गई।

मौजूदा स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता

अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने वर्तमान स्वास्थ्य ढांचे पर चिंता जताते हुए कहा कि आज “इमरजेंसी सेवाएं खुद इमरजेंसी में हैं।” उन्होंने एम्स (AIIMS) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में स्टाफ की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों के अभाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जब तक इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत नहीं होगा, तब तक होलिस्टिक हेल्थ का सपना पूरा नहीं हो सकता।

भविष्य का रोडमैप

डिजिटल हेल्थ और जन-आंदोलन भविष्य के लिए अपना विजन रखते हुए अखिलेश यादव ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए:

  • हेल्थ लिटरेसी: प्राइमरी स्कूल से ही बच्चों को स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाए।

  • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर: टेली-मेडिसिन (Tele-medicine) के जरिए दूर-दराज के गांवों तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह पहुंचाई जाए।

  • आशा वर्कर्स का सम्मान: आशा बहुओं और स्वास्थ्य कर्मियों को सम्मानजनक मानदेय और आर्थिक सुरक्षा दी जाए, क्योंकि वे हेल्थ सिस्टम की रीढ़ हैं।

  • एकीकृत चिकित्सा पद्धति: एलोपैथी के साथ-साथ आयुष, योग और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को जोड़कर इलाज किया जाए।

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और सोशल मीडिया की नकारात्मकता से बचने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुधारों को एक सामाजिक जन-आंदोलन का रूप देना होगा, तभी हम एक स्वस्थ और खुशहाल भारत का निर्माण कर सकते हैं।

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