बस्ती में उमड़ा ‘पीडीए मार्च’ का जनसैलाब: अखिलेश यादव बोले— "2027 में मिलेगा घमंड का दंड, अब कोई नहीं कर पाएगा पीडीए का इस्तेमाल"

बस्ती में उमड़ा ‘पीडीए मार्च’ का जनसैलाब: अखिलेश यादव बोले— "2027 में मिलेगा घमंड का दंड, अब कोई नहीं कर पाएगा पीडीए का इस्तेमाल"

बस्ती: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में आयोजित विशाल ‘पीडीए मार्च’ के जरिए समाजवादी पार्टी और विपक्षी गठबंधन ने जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। भारी संख्या में पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक, आधी आबादी और आदिवासी वर्ग के लोगों ने इस मार्च में हिस्सा लिया। बस्ती की सड़कों पर उमड़े जनसैलाब की तस्वीरें साझा करते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि इस ऐतिहासिक मार्च को देखकर पूरे उत्तर प्रदेश में भाजपा के होश उड़ गए हैं।

अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयानों पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने ‘5 सेकंड के वीडियो’ में अपने चिरपरिचित धमकी भरे अंदाज़ में यह स्वीकार कर लिया है कि उनके राज में पीडीए समाज का उत्पीड़न रुकने वाला नहीं है, बल्कि बढ़ने वाला है।

'बदले की भावना से काम कर रही सरकार'

सपा मुखिया ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष ऐसा व्यवहार कर रहा है जैसे वह पीडीए (पीड़ित, दुखी, अपमानित और पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) समाज से कोई व्यक्तिगत बदला लेना चाहता हो। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों में वंचितों, शोषितों और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार व अन्याय लगातार बढ़ रहा है, लेकिन अब यह समाज पूरी तरह जाग चुका है और किसी भी प्रकार की गीदड़ भभकियों से डरने वाला नहीं है।

2024 की तरह 2027 में भी सिखाएंगे सबक

अखिलेश यादव ने आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने कहा, "जिस तरह 2024 के लोकसभा चुनाव में पीडीए समाज ने एकजुट होकर प्रभुत्ववादी ताकतों को धूल चटाई थी, उसी तरह 2027 के विधानसभा चुनाव में भी जनता अपने मताधिकार की ताकत दिखाएगी।" उन्होंने दावा किया कि 2027 में सत्ताधारी दल अपने घमंड का दंड पाएगा और प्रदेश से हमेशा के लिए विदा हो जाएगा।

'अब कोई इस्तेमाल नहीं कर पाएगा'

बस्ती में हुए इस मार्च को 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीतिक जमीन तैयार करने के तौर पर देखा जा रहा है। सपा नेतृत्व ने दो टूक कहा कि पीडीए समाज ने अब यह ठान लिया है कि वह अपने हक और अधिकारों की रक्षा के लिए अपनी खुद की सरकार बनाएगा। अब राजनीतिक दल केवल वोट बैंक के तौर पर पीडीए समाज का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। बस्ती में हुए इस विशाल आयोजन ने पूर्वांचल के राजनीतिक माहौल में खासी हलचल पैदा कर दी है।