UP News: राहुल गांधी से मुलाकात के बाद स्वामी प्रसाद मौर्य का INDIA गठबंधन में शामिल होने का ऐलान
नई दिल्ली / लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में गैर-यादव ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) के कद्दावर चेहरे और पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक बार फिर बड़ा सियासी दांव चला है। दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से लंबी मंत्रणा के बाद मौर्य ने अपनी पार्टी के INDIA गठबंधन में शामिल होने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।
मुख्य बिंदु: बैठक और गठबंधन का फैसला
- 10 जनपथ पर शीर्ष मंथन: स्वामी प्रसाद मौर्य ने नई दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की। इस उच्चस्तरीय बैठक में उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम भी मौजूद रहे।
- गठबंधन का आधिकारिक फैसला: बैठक के बाद मौर्य ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी अब औपचारिक रूप से राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन 'INDIA' का घटक दल बन गई है।
- कांग्रेस को बताया एकमात्र विकल्प: उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पटल पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसकी नीतियों को रोकने की वैचारिक व संगठनात्मक क्षमता केवल कांग्रेस के पास है, इसलिए देश के लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए समान विचारधारा वाले दलों को एकजुट होना अनिवार्य है।
अखिलेश यादव पर सीधा प्रहार: "सड़क नहीं, सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस की सियासत"
गठबंधन में शामिल होते ही स्वामी प्रसाद मौर्य के निशाने पर उनके पूर्व सहयोगी अखिलेश यादव रहे। मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने सपा नेतृत्व पर तीखे सवाल उठाए:
- जमीनी संघर्ष का अभाव: मौर्य ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव जनता के मुद्दों पर सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के बजाय केवल वातानुकूलित कमरों और प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित राजनीति करते हैं।
- राज्यसभा टिकटों पर सवाल: उन्होंने सपा द्वारा पूंजीपतियों और उद्योगपतियों को राज्यसभा भेजे जाने पर तंज कसते हुए कहा कि यह डॉ. राम मनोहर लोहिया और नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के मूल समाजवाद के सिद्धांतों के खिलाफ है।
- सामूहिक नेतृत्व की मांग: उन्होंने दो-टूक कहा कि उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन को किसी एक क्षेत्रीय दल या व्यक्ति विशेष के अधीन नहीं, बल्कि सभी घटक दलों के 'सामूहिक नेतृत्व' के आधार पर आगे बढ़ना होगा।
राजनीतिक मायने और समीकरण (विश्लेषण)
- कांग्रेस का सोशल इंजीनियरिंग कार्ड: कांग्रेस उत्तर प्रदेश में दलित, मुस्लिम और गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक को दोबारा अपने पाले में लाने की रणनीति पर काम कर रही है। स्वामी प्रसाद मौर्य के जुड़ने से पार्टी को कोइरी, मौर्य, शाक्य और सैनी बिरादरी के बीच अपनी पैठ मजबूत करने का एक मुखर चेहरा मिला है।
- सपा पर दबाव की रणनीति: लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में सपा बड़े भाई की भूमिका में उभरी थी। मौर्य को INDIA गठबंधन में शामिल कर कांग्रेस ने राज्य में सपा के दबदबे को संतुलित करने और सीटों के बंटवारे में अपनी सौदेबाजी की ताकत बढ़ाने का संकेत दिया है।
- पूर्वांचल में चुनावी जमीन: मौर्य का आधार मुख्य रूप से पूर्वांचल (विशेषकर कुशीनगर, देवरिया, पडरौना और आसपास के जिलों) में माना जाता है। इस नए राजनीतिक समीकरण के बाद आगामी विधानसभा चुनावों में मौर्य या उनके करीबियों के पूर्वांचल की पारंपरिक सीटों से ताल ठोकने की पूरी जमीन तैयार हो गई है।