चुनाव आयोग के खिलाफ सड़क पर उतरा INDIA गठबंधन; अखिलेश यादव बोले— "आयोग निष्पक्षता भूल चुका है"
संविधान और वोट के अधिकार पर वार बर्दाश्त नहीं: निर्वाचन सदन कूच पर निकला ‘INDIA’ गठबंधन, अखिलेश यादव बोले— "आयोग निष्पक्षता भूल चुका है"
नई दिल्ली: संसद के मकर द्वार से मंगलवार सुबह शुरू हुआ सियासी तापमान निर्वाचन सदन तक पहुंचते-पहुंचते उफान पर आ गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली, मतदाता सूचियों में कथित हेरफेर और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तौर-तरीकों के खिलाफ विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन ने आर-पार का मोर्चा खोल दिया है। इस संयुक्त विरोध मार्च में समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव अपने तमाम सांसदों और प्रमुख नेताओं के साथ अगली कतार में झंडा बुलंद किए नजर आए।
संसद परिसर से शुरू होकर निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर बढ़े इस मार्च में कांग्रेस, सपा, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक और वाम दलों समेत गठबंधन के प्रमुख घटक दलों के सांसद तख्तियां और बैनर थामे पैदल चले। तख्तियों पर "लोकतंत्र बचाओ", "वोट का अधिकार बहाल करो" और "निष्पक्ष चुनाव आयोग चाहिए" जैसे नारे दर्ज थे।
अखिलेश यादव का तीखा वार: "आयोग केवल भाजपा कार्यकर्ताओं को नागरिक मान रहा है"
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पैदल मार्च के दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है।
"चुनाव आयोग की कार्यशैली से ऐसा प्रतीत होता है मानो देश में केवल भाजपा कार्यकर्ताओं को ही वोट डालने और नागरिक कहलाने का अधिकार रह गया है। गरीब, वंचित और अल्पसंख्यक वर्गों के नाम चुन-चुनकर मतदाता सूचियों से हटाए जा रहे हैं। यह महज एक चुनाव की लड़ाई नहीं, बल्कि देश के संविधान और नागरिक अधिकारों को बचाने का संघर्ष है।"
अखिलेश यादव के साथ डिंपल यादव, रामगोपाल यादव सहित सपा के दोनों सदनों के सभी सांसद लाल टोपी लगाए मार्च में शामिल रहे। सपा का आरोप है कि उत्तर प्रदेश में हालिया उपचुनावों और वोटर रिवीजन में बड़े पैमाने पर 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) मतदाताओं के वोट काटे गए हैं।
विरोध के तीन प्रमुख बिंदु
विपक्ष के इस साझा प्रदर्शन के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण सामने आए हैं:
- वोटर लिस्ट में हेरफेर का आरोप: विपक्षी दलों का दावा है कि आयोग द्वारा किए जा रहे स्पेशल रिवीजन में गैर-भाजपा समर्थित इलाकों और समुदायों के वोटरों के नाम संदिग्ध रूप से गायब किए जा रहे हैं।
- सीईसी के इस्तीफे की मांग: गठबंधन के नेताओं ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार आयोग के भीतर सर्वसम्मति के बजाय एकतरफा फैसले ले रहे हैं। विपक्ष ने उनके नैतिक इस्तीफे की मांग उठाई है।
- पारदर्शिता का अभाव: विपक्ष की शिकायतों पर आयोग द्वारा त्वरित सुनवाई या ठोस कार्रवाई न करने को लेकर भी नेताओं में भारी आक्रोश है।
दिल्ली की सड़कों पर पहरा, कई इलाकों में ट्रैफिक डायवर्ट
सांसदों के पैदल मार्च के ऐलान के बाद दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली में चाक-चौबंद सुरक्षा घेरा तैयार किया।
- संसद मार्ग, विजय चौक, पटेल चौक और निर्वाचन सदन के मुख्य द्वार के सामने मल्टी-लेयर बैरिकेडिंग लगाई गई।
- रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और पुलिस की अतिरिक्त कंपनियों को तैनात किया गया।
- अशोका रोड, जंतर-मंतर रोड और कनॉट प्लेस के आउटर सर्किल की ओर जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा कारणों से वाहनों की आवाजाही नियंत्रित की गई, जिससे सुबह के वक्त कई प्रमुख चौराहों पर लंबा जाम देखा गया।
विपक्षी नेताओं ने साफ किया है कि यह विरोध केवल संसद या दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। 2 से 8 अक्टूबर तक देश भर में चलाए जा रहे ‘सेव डेमोक्रेसी’ अभियान के तहत इसे अब राज्य और जिला स्तर पर भी आक्रामक रूप से ले जाया जाएगा। आयोग से मिलने के लिए विपक्षी प्रतिनिधिमंडल ने समय मांगा है, ताकि इस पूरे मामले पर औपचारिक विरोध पत्र सौंपा जा सके।