अखिलेश का सरप्राइज: रामगोपाल यादव के साथ रिलायंस के धनराज नथवानी बने सपा के राज्यसभा उम्मीदवार

अखिलेश का सरप्राइज: रामगोपाल यादव के साथ रिलायंस के धनराज नथवानी बने सपा के राज्यसभा उम्मीदवार

लखनऊ: समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सीटों के लिए दो नामों का ऐलान कर सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता प्रोफेसर रामगोपाल यादव के साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया। दोनों ने बुधवार सुबह पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल कर दिया।

यह नाम इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि धनराज नथवानी न तो सपा के पुराने नेता हैं, न यूपी की चुनावी राजनीति से जुड़े रहे हैं। उनके पिता परिमल नथवानी इसी साल जून में झारखंड से एनडीए समर्थित निर्दलीय के रूप में चौथी बार राज्यसभा पहुंचे हैं। पिता एक खेमे में, बेटा दूसरे खेमे में—यही इस कहानी का सबसे बड़ा पॉलिटिकल प्वाइंट है। 

अपने इस कदम से अखिलेश यादव ने विरोधी भारतीय जनता पार्टी काे चारो खाने चित कर दिया है। 

राज्यसभा चुनाव का गणित

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। चुनाव आयोग ने 16 अक्टूबर को मतदान निर्धारित किया है। नामांकन की अंतिम तिथि 6 अक्टूबर है।

विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के हिसाब से एनडीए के पास आठ सीटें लगभग सुनिश्चित मानी जा रही हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के 101 विधायकों और कांग्रेस के दो विधायकों के साथ दो सीटें सपा के खाते में जा सकती हैं। एक सीट के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वोट चाहिए होते हैं। सपा ने तीन नामांकन पत्र भी खरीदे थे, लेकिन फिलहाल दो ही नामों की घोषणा हुई है। तीसरे उम्मीदवार पर अभी सस्पेंस बना हुआ है।

आज नामांकन के दौरान अखिलेश यादव मौजूद रहे। रामगोपाल यादव सपा के राष्ट्रीय महासचिव और मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं। वे पार्टी की वैचारिक निरंतरता का चेहरा माने जाते हैं।

समाजवादी पार्टी ने सुबह आधिकारिक घोषणा की कि राज्यसभा के लिए अधिकृत प्रत्याशी प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी हैं। दोनों ने करीब 11 बजे लखनऊ में नामांकन पत्र दाखिल किया। अखिलेश यादव खुद उनके साथ मौजूद रहे।

नामांकन के बाद धनराज नथवानी ने एक्स पर लिखा:

“उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए मुझे समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार बनाए जाने पर माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी का हृदय से आभार। सार्वजनिक जीवन के इस नए पड़ाव की ओर आज लखनऊ में अखिलेश यादव जी की उपस्थिति में मैंने नामांकन दाखिल किया।”

अखिलेश यादव की पहली प्रतिक्रिया थी—“नई पीढ़ी, नई सोच।” उन्होंने कहा कि उद्योग जगत से जुड़ाव उत्तर प्रदेश के विकास और रोजगार के लिए जरूरी है।

दिलचस्प बात यह है कि एक दिन पहले तक आलोक रंजन का नाम चर्चा में था। मंगलवार को धनराज नथवानी महाराष्ट्र नंबर की गाड़ी से लखनऊ पहुंचे, अखिलेश से करीब चार घंटे मिले और फिर नाम फाइनल हो गया। 24 घंटे में पूरा समीकरण बदल गया।

कौन हैं धनराज परिमल नथवानी

जन्म: 5 फरवरी 1986, मुंबई
पिता: परिमल नथवानी
माता: वर्षा नथवानी
पत्नी: भूमि नथवानी (शादी 2014)

पढ़ाई: लंदन के रेजेंट्स बिजनेस स्कूल से इंटरनेशनल बिजनेस, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से कॉर्पोरेट लॉ और पब्लिक रिलेशंस में एमबीए।

करियर: करीब 16 साल से रिलायंस से जुड़े हैं। वर्तमान पद—ग्रुप प्रेसिडेंट, रिलायंस इंडस्ट्रीज। रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड के निदेशक भी हैं। जामनगर और वडोदरा मैन्युफैक्चरिंग डिवीजनों की गैर-तकनीकी जिम्मेदारी (फाइनेंस, एचआर, प्रोक्योरमेंट, कॉर्पोरेट अफेयर्स, सीएसआर) उनके पास रही है। अंबानी परिवार के बेहद करीबी माने जाते हैं।

खेल प्रशासन: गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष। 2022 में अमित शाह के बाद यह पद संभाला। नरेंद्र मोदी स्टेडियम के निर्माण दौर में परिवार की भूमिका रही—अमित शाह अध्यक्ष, परिमल नथवानी उपाध्यक्ष, जय शाह संयुक्त सचिव। धनराज पहले उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। गुजरात स्टेट फुटबॉल एसोसिएशन से भी जुड़े रहे।

अन्य भूमिकाएं: द्वारकाधीश मंदिर प्रशासनिक समिति के उपाध्यक्ष, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण गतिविधियों से जुड़े। गिर के शेरों के संरक्षण में रुचि। फोटोग्राफी और यात्रा शौक।

वे गुजरात के लोहाना व्यापारिक समुदाय से हैं। यूपी की पारंपरिक सपा राजनीति से उनका कोई पुराना संगठनात्मक रिश्ता नहीं दिखता। यही वजह है कि यह टिकट “वाइल्ड कार्ड” माना जा रहा है।

पिता परिमल नथवानी: एनडीए वाले सांसद

परिमल नथवानी का जन्म 1 फरवरी 1956 को मुंबई में हुआ। रिलायंस में कॉर्पोरेट अफेयर्स के वरिष्ठ अधिकारी रहे। 1995 से कंपनी से जुड़े माने जाते हैं। झारखंड और आंध्र प्रदेश से राज्यसभा में रहे। जून 2026 में झारखंड से निर्दलीय (एनडीए समर्थन) के रूप में चौथी बार चुने गए।

वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। अंबानी परिवार से पुराना और गहरा रिश्ता है।

SP’s Ram Gopal Yadav, Dhanraj Nathwani file nominations for Rajya  Sabha from Uttar Pradesh

नाव का पूरा गणित

  • यूपी की 10 राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं। कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को खत्म।
  • मतदान: 16 अक्टूबर 2026, सुबह 9 से शाम 4 बजे। उसी दिन शाम 5 बजे से गिनती।
  • नामांकन अंतिम तिथि: 6 अक्टूबर
  • जांच: 7 अक्टूबर
  • नाम वापसी: 9 अक्टूबर

विधानसभा की प्रभावी संख्या करीब 397 है। एक सीट के लिए लगभग 37 प्रथम वरीयता वोट चाहिए।

मौजूदा समीकरण:

  • एनडीए: करीब 8 सीटें लगभग पक्की
  • सपा (101) + कांग्रेस (2): 2 सीटें पक्की
  • तीसरी सीट के लिए सपा को बाहर से 8-9 वोट चाहिए होंगे

सपा ने तीन नामांकन पत्र खरीदे थे। दो नाम आ गए, तीसरा अभी लटका है। शाम तक चर्चा सलीम शेरवानी और आलोक रंजन के इर्द-गिर्द थी। सूत्रों के मुताबिक तीसरे नाम पर फैसला 2-3 अक्टूबर के बाद हो सकता है।

सपा नेता इमरान प्रतापगढ़ी/हसन खेमे से दावा आया कि तीनों जिताए जाएंगे और “और सरप्राइज आने वाले हैं।” क्रॉस वोटिंग की अटकलें भी चल रही हैं, लेकिन अभी पुष्टि नहीं है।

क्यों दिया अखिलेश ने यह टिकट?

तीन व्याख्याएं चर्चा में हैं:

  1. उद्योग और निवेश वाला संदेश — अखिलेश खुद कह रहे हैं कि नई सोच और इंडस्ट्री कनेक्ट चाहिए। 2027 विधानसभा से पहले विकास-रोजगार का नैरेटिव।
  2. संसाधन और नेटवर्क — नथवानी परिवार का कॉर्पोरेट, गुजरात क्रिकेट और दिल्ली-मुंबई नेटवर्क मजबूत है। कुछ विश्लेषक इसे मीडिया-मैनेजमेंट और तीसरी सीट के लिए संभावित समर्थन से भी जोड़कर देख रहे हैं।
  3. पार्टी के अंदर सरप्राइज वाली स्टाइल — अखिलेश पहले ही कह चुके थे कि इस बार सरप्राइज होगा। आलोक रंजन की जगह रातोंरात नथवानी का नाम आना उसी पैटर्न में बैठता है।

विपक्षी और सोशल मीडिया पर सवाल भी उठ रहे हैं—PDA वाली राजनीति में गुजरात के कॉर्पोरेट चेहरे को टिकट क्यों? कार्यकर्ताओं में कुछ नाराजगी के स्वर भी दिखे। शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने बधाई दी।

आगे क्या होगा

16 अक्टूबर को मतदान है। रामगोपाल यादव का जीतना लगभग तय माना जा रहा है। धनराज नथवानी के लिए भी सपा के अपने वोट काफी हैं। असली खेल तीसरे उम्मीदवार और संभावित क्रॉस वोटिंग का है।

नामांकन दाखिल हो चुका है, लेकिन पूरा पैकेज अभी अधूरा है—क्योंकि अखिलेश का तीसरा पत्ता अभी खुला नहीं है। उसी पर अगले 5-6 दिन यूपी की राजनीति टिकी रहेगी। बाकी कहानी 16 अक्टूबर और उसके बाद लिखी जाएगी।